मंगलवार, 26 मई 2020

और मेढक ने कोशिश जारी रखी



एक बार की बात है । बहुत से मेढक जंगल से गुजर रहे थे । वे सभी आपसी बातचीत में कुछ ज्यादा ही मशगूल थे । तभी उनमें से दो मेढक एक गड्ढे में गिर पड़े । बाकी मेढकों ने देखा कि उनके दो साथी गहरे गड्ढे में गिर गए हैं , तो वे भागने लगे । गड्ढा गहरा था और इसलिए बाकी साथियों को लगा कि अब उन दोनों का गड्ढे से बाहर निकल पाना मुश्किल है । साथियों ने गड्ढे में गिरे उन दोनों मेढकों को आवाज लगाकर कहा कि अब तुम खुद को मरा हुआ मानो । इतने गहरे गड्ढे से बाहर निकल पाना असंभव है । दोनों मेढकों ने बात को अनसुना कर दिया और बाहर निकलने के लिए कूदने लगे । बाहर झुंड में खड़े मेढक उनसे चीखकर कहने लगे कि बाहर निकलने की कोशिश करना बेकार है । अब तुम बाहर नहीं आ पाओगे । थोड़ी देर तक कूदा - फांदी करने के बाद भी जब दोनों मेढक गड्ढे से बाहर नहीं निकल पाए तो एक मेढक ने आस छोड़ दी और वह गड्ढे में और नीचे की तरफ लुढ़क गया । नीचे लुढ़कते ही वह मर गया । दूसरे मेढक ने कोशिश जारी रखी और अंततः पूरा जोर लगाकर एक छलांग लगाने के बाद वह गड्ढे से बाहर आ गया । जैसे ही दूसरा मेढक गड्ढे से बाहर आया तो बाकी मेढक साथियों ने उससे पूछा ,
“ जब हम तुम्हें कह रहे थे की गड्ढे से बाहर आना संभव नहीं है , तब भी तुम छलांग मारते रहे , क्यों ? "
" इस पर उस मेढक ने जवाब दिया , " दरअसल , मैं थोड़ा - सा ऊंचा सुनता हूं और जब मैं छलांग लगा रहा था , तो मुझे लगा कि आप मेरा हौसला बढ़ा रहे हैं । इसलिए मैंने कोशिश जारी रखी और देखिए , मैं बाहर आ गया ।" 
मेढक की तरह ही व्यक्ति को आखिरी सांस तक कोशिश जारी रखनी चाहिए । तभी अंत में विजय उसके कदम चूमती है ।

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