मंगलवार, 16 मार्च 2021

राजा के कुर्ते का बटन

 एक राजा अपनी प्रजा का हाल - चाल जानने के लिए गांव घूम रहा था । घूमते - घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया । राजा ने मंत्री से कहा , पता करो कि इस गांव में कौन दर्जी है , जो मेरे कुर्ते का बटन लगा सकता है । मंत्री को पता चला कि गांव में एक ही दर्जी है , जिसका नाम है सुखीराम । उसे राजा के सामने ले जाया गया । राजा ने कहा कि तुम मेरे कुर्ते का बटन लगा सकते हो ? सुखीराम ने कहा , " हुजूर यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है , यह कार्य तो मैं रोज करता हूं । " सुखीराम ने एक बटन लिया और धागे से राजा के कुर्ते का बटन लगा दिया । टूटा हुआ बटन राजा के पास ही था , इसलिए दर्जी को केवल अपने धागे का इस्तेमाल करना पड़ा राजा ने दर्जी से पूछा , " कितने पैसे दूं ? " उसने कहा

                 महाराज , रहने दो ।" राजा फिर दर्जी से कहा , " बोलो , कितनी मुद्राएं दूं ?" सुखीराम ने सोचा कि दो रुपये मांग लेता हूं । फिर मन में सोचा कि कहीं राजा यह न सोच ले यह बटन लगाने के बदले में मुझसे दो रुपये ले रहा है , तो गांव वालों से कितना लेता होगा ? उसने राजा से कहा कि महाराज , आपको जो भी उचित लगे वह दे दो । राजा ने मंत्री से कहा , इस दर्जी को दो गांव दे दो । कहां दर्जी सिर्फ दो रुपये की मांग कर रहा था और कहां राजा ने उसे दो गांव दिए सुखीराम ने प्रसन्नतापूर्वक दोनों गांव की जागीर कुबूल कर ली । इसलिए जो संतोषी होते हैं और सच्चाई पर रहते हैं , जिंदगी में खुशियां उनके पास ही आती हैं

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