एक व्याध देविका नदी के तट पर तपस्या कर रहा था । दुर्वासा ऋषि वहां आ पहुंचे । उन्होंने नदी में स्नान किया तथा तट पर बैठकर पूजा अर्चना की । दुर्वासा जी को भूख बहुत सताती थी । व्याध ने वनदेवियों से शुद्ध आहार तैयार कराकर दुर्वासा जी कोभोजन कराया । दुर्वासा ऋषि ने तृप्त होकर वर दिया , तुम सत्यतपा ऋषि के नाम से ख्याति प्राप्त करोगे । इंद्र व विष्णु तुम्हारी परीक्षा लें , तब भी तुम सत्य पर अडिग रहोगे । एक दिन सत्यतपा ऋषि वन में बैठे थे । अचानक एक वराह सामने सेगुजरा और ओझल हो गया ।पीछे - पीछे शिकारी पहुंच गया । उसने मुनि से पूछा , क्या तुमने वराह को जाते देखा है ? मुनि ने सोचा कि वह सच बताता है , तो शिकारी वराह को मार देगा । यदि नहीं बताता , तो शिकारी का परिवार भूखा रह जाएगा । मुनि ने कहा , वराह को आंखों ने देखा है , पर वे बोल नहीं सकतीं । जिह्वा बोल सकती है , किंतु उसने वराह को देखा नहीं । तभी मुनि ने देखा कि सामने शिकारी की जगह विष्णु और इंद्र खड़े हैं । उन्होंने कहा , मुनिवर , वास्तव में तुम सत्य-असत्य के रहस्य व उसके परिणाम को समझते हो, सत्य बोलते समय उसका परिणाम क्या होगा , यह विवेक ही उचित निर्णय ले सकता है । सत्यतपा मुनि को वर देकर दोनों लौट गए ।
सोमवार, 17 मई 2021
सोमवार, 26 अप्रैल 2021
समस्याओ का समाधान करें
पढ़े:- चिड़िया की चौथी बात
जहां एक छात्र ने कहा कि यह आपके हाथ को सुन्न कर सकता है , आपकी मांसपेशियों को बहुत अधिक तनाव हो सकता है , लकवा मार सकता है और निश्चित रूप से आपको अस्पताल जाना पड़ सकता है । उसकी बात सुनकर बाकी छात्र हंस पड़े । प्रोफेसर ने पूछा , " बहुत अच्छा , लेकिन क्या इस दौरान ग्लास का वजन बदल गया ? " छात्रों ने उत्तर दिया ' नहीं ।
फिर उन्होंने कहा , फिर मेरे हाथ में दर्द और मांसपेशियों में तनाव क्यों था ? छात्र हैरान थे । तब प्रोफेसर ने पूछा , दर्द से छुटकारा पाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए ? एक छात्र ने कहा कि गिलास को नीचे रख देना चाहिए । प्रोफेसर ने कहा , बिल्कुल सही !! हमें भी अपने जीवन की समस्याओं को झेलने की बजाय उसका समाधान करना चाहिए ।
मंगलवार, 16 मार्च 2021
राजा के कुर्ते का बटन
एक राजा अपनी प्रजा का हाल - चाल जानने के लिए गांव घूम रहा था । घूमते - घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया । राजा ने मंत्री से कहा , पता करो कि इस गांव में कौन दर्जी है , जो मेरे कुर्ते का बटन लगा सकता है । मंत्री को पता चला कि गांव में एक ही दर्जी है , जिसका नाम है सुखीराम । उसे राजा के सामने ले जाया गया । राजा ने कहा कि तुम मेरे कुर्ते का बटन लगा सकते हो ? सुखीराम ने कहा , " हुजूर यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है , यह कार्य तो मैं रोज करता हूं । " सुखीराम ने एक बटन लिया और धागे से राजा के कुर्ते का बटन लगा दिया । टूटा हुआ बटन राजा के पास ही था , इसलिए दर्जी को केवल अपने धागे का इस्तेमाल करना पड़ा राजा ने दर्जी से पूछा , " कितने पैसे दूं ? " उसने कहा
महाराज , रहने दो ।" राजा फिर दर्जी से कहा , " बोलो , कितनी मुद्राएं दूं ?" सुखीराम ने सोचा कि दो रुपये मांग लेता हूं । फिर मन में सोचा कि कहीं राजा यह न सोच ले यह बटन लगाने के बदले में मुझसे दो रुपये ले रहा है , तो गांव वालों से कितना लेता होगा ? उसने राजा से कहा कि महाराज , आपको जो भी उचित लगे वह दे दो । राजा ने मंत्री से कहा , इस दर्जी को दो गांव दे दो । कहां दर्जी सिर्फ दो रुपये की मांग कर रहा था और कहां राजा ने उसे दो गांव दिए सुखीराम ने प्रसन्नतापूर्वक दोनों गांव की जागीर कुबूल कर ली । इसलिए जो संतोषी होते हैं और सच्चाई पर रहते हैं , जिंदगी में खुशियां उनके पास ही आती हैं